Tuesday, 26 April 2011

MERI MADHOSH KAR DENE WALI DILLI YATRA

   मित्रों मैं एक २४ वर्षीय और खुले विचारो वाली लडकी  हूँ . जब भी कोई CUTE लड़का मेरे ऊपर लाइन मरता है तो मुझसे फिसले बिना नहीं रहा जाता है . पहले तो   मैं सिर्फ अपने BOYFRIEND  के साथ सेक्स करना पसंद करती थी पर कुछ महीने पहले मेरी दिल्ली यात्रा ने मेरे विचारों को बिकुल बदल कर रख दिया . अपनी इस दिल्ली यात्रा से मैंने एक हसीं सच को जाना की किसी अजनबी के साथ सेक्स करने का अनुभव वास्तव में अद्वितीय है . 
                      अधिक समय व्यर्थ किये बिन्स मैं सीधे घटना पर आती हु . हुआ यूँ की मुझे अपने एम् बी ए का फ़ाइनल सेमिस्टर का एग्जाम देने दिल्ली जाना था पर पापा कुछ कारणों से साथ नहीं जा सकते थे. मुझे जाना बहुत आवश्यक लग रहा था इस बात को मेर पापा भी समझ रहे थे उनके साथ मैं दिल्ली कई बार गयी थी दिल्ली मेर लिए कोई नयी नहीं रह गयी थी . सो पापा    ने मुझे अकेले ही जाने दिया . बस एक शर्त थी की वहां मैं अपनी सहेली के ही घर रुकू . मैं इस के लिए तैयार हो गयी .
                         पहली बार दिल्ली अकेली जा रही थी पर पता नहीं मुझे डर क्यूँ नहीं लग रहा था . उल्टा मुझे एक रोमांच का एहसास हो रहा था . मैं जब दिल्ली जाने के लिए पटना स्टेशन   पे पहुची तो मेरी    ट्रेन आने ही वाली थी . सो मुझे अधिक इंतिजार नहीं करना पड़ा मेरा रिजर्वेशन दुसरे श्रेणी के  ए सी बोगी    में था . मैंने अपनी सीट ढूंढकर  बैठ गयी अभी शाम के ४:३० हो रहे थे . पर  मेर कपडे बहुत कसे हुए थे मुझे थोड़ी परेशानी हो रही थी सो मैंने सोच लिया था कि ट्रेन चले तो बाथरूम में जाकर अपने कपडे बदल लूंगी . ट्रेन चली तो मैंने अपने आस पास के यात्रियों को देखना शुरू किया कि कही कोई महिला यात्री हो तो कुछ बात चीत करू पर मुझे कोई महिला यात्री नहीं मिली . हा एक गोरा सा स्लिम फिट बोडी वाला लड़का जरूर मिल गया . उसपर से मेरी नजर तो जैसे हटने का नाम ही नहीं ले रारी थी वो भी मेरी ठीक सामने वाली सीट पर बैठा लगातार मुझे घूरे जा रहा था. मैं जब भी उसे नजरंदाज करने कि कोशिश करती वो अपनी फोन में अजीब अजीब रिंग टन बजाकर मेर ध्यान अपनी और ले लेता मैं जब भी उसकी और देखती वो मुस्कुरा देता . मैं समझ गयी कि ये तो गया .  
फिर    मैं एक बुक निकलकर पढ़ने लगी अभी लगभग ५ मिनट ही हुए होंगे कि एक आवाज मेरी कानो से टकराई मैडम  क्या आपके पास पानी होगी मैंने देखा कि वही लड़का मुझसे पानी मांग रहा है  पता नहीं क्यूँ   मेरी पुरे बदन में  एक सुरसुरी सी दौड़ने लगी  मैं जैसे अपने वश में नहीं थी  मैंने अपने पास से पानी का बोतल निकल कर उसे दे दिया  पर उसने दो घुट पानी पी कर वापस मुझे दे दिया . मैं समझ गयी कि उसे प्यास नहीं लगी है  वो तो बस मिझ्से बात करने की जुगत लगा रह है
मुझे भी इस बात से कहा गुरेज था   मैं तो खुश हो रही थी कि चलो मुझे म्हणत नहीं करनी पडी .  फिर मुझे यद् आया कि अरे मुझे तो कपडे  भी बदलने हैं . मैंने उस से कहा--- सुनिए क्या आप थोड़ी  देर के लिए मेरा सामान देखेंगे  मैं दस मिनुत में बाथरूम से आ रही    हु  वो तैयार हो गया फिर मैंने अपने बैग से कपडे निकले और बाथरूम चली गयी अभी    बाथरूम कइ गेट पर पहुची ही थी कि  कि मुझे एक बात सूझी   मैंने खुद से कहा  सोनी  मौका मत चूक इस लड़के को थोडा एक्सपोज कर अपने फिगर की गोलाई और गहराई दिखा   मैं वापस मुड़ी और अपने बैग   से लो  वेस्ट जींस निकाली और एक सेक्सी गहरे गले वाला टॉप निकली और फिर वापस बाथरूम चली गयी कपडे बदले और वापस आ  गयी . उस   ने  कहा इन कपड़ो में आप बहुत खूबसूरत लग रही है  उसका ऐसा कहना जैसे मेर अंग अंग के  तारो को छेड़ गया मुझे अपने face और सीने पर गर्मी महसूस होने लगी   मैं कुछ नहीं समझ पाई कि उसे मैं क्या बोलू  बस  थैंक्स कह कर बैठ गयी. उसने मुझे खा जाने वाली नजरों से देखते हुए कहा यु आर वेलकम जवाब में मैंने भी मुस्कुरा दिया . फिर मैं अपना मोबाइल निकलकर गेम खेलने लगी तभी उस लड़के ने पूछा मैडम क्या मैं आपका मोबाइल देख सकता हु इस से पहले की मैं उसे कुछ कहती वो मेरी बगल में आकर बैठ गया मन बिना कुछ बोले उसे मोबाइल देने के लिए अपना हाथ बढाया उसने मोबाइल तो लिया पर लेते समय मेरी हथेली को दबा दिया . पता नहीं ए. सी . में भी मुझे गर्मी क्यूँ लगने लगी थी . मुझे उसकी हाथों का स्पर्श बार बार याद आ रहा था मैंने फिर से एक किताब निकला और पढने लगी उसने मुझसे पूछा क्या आपके पास कोई और किताब है मैंने उसे के दूसरी किताब निकल कर दे दी वो मेरी बगल में ही बैठा पढने लगा क्या मैं अपना मोबाइल ले सकती हु ये कहते हुए मैं ने उसकी जांघ पे रखे अपना मोबाइल को उठा लिया फिर मैंने पूछा क्या आपकी मोबाइल में कोई आच्छा गेम है उसने अपना मोबाइल निकला और गेम दिखने लगा मैं अपनी एक हाथ उसकी जन्घो पर रख दिया और उसकी तरफ थोड़ी झुक कर गेम देखने लगी उसने अपना एक हाथ मेरे कंधे पर रख दिया बस क्या था मैंने अपनी उँगलियों से उसकी जन्घो को रुक रुक कर सहलाना शुरू किया केबिन में अँधेरा हो चूका था हम दोनों के बीच कोई दूरी नहीं थी उसने अपना हाथ मेरे कंधो से हटाकर मेरी कमर पर रख दिया और मुझे कमर के पास सहलाने लगा केबिन में कोई नहीं था ट्रेन में कई सीट खाली थे बस कुछ गिने चुने लोग ही होंगे उसकी जन्घो को सहलाते सहलाते मुझे उसकी जेब के पास कुछ महसूस हुआ मैं थोड़ी सकपकयी पर सारी शर्म भूल कर उसके लिंग को ऊपर से सहलाने लगी अभी तक  वो मेरी कपड़ो के नीचे पहुच चूका था मैं अचानक उठी उसने पूछा क्या हुआ मैंने कहा मुझे बाथरूम जाना है पर मुझे अकेले दर लगेगा क्या आप मेरे साथ चलेंगे इतना सुनते ही वो उठा और मेरे साथ चल पड़ा हम दोनों बाथरूम के पास पहुचे तो उसने मेरे हाथ पकड़ कर धीरे से दबाया मैं बाथरूम में घुसी और कुछ सोचकर दरवाजा खुला छोड़  दिया वो दरवजे के पास आया और धीरे से  बोला दरवजा क्यूँ नहीं बहद किया मैंने हाथ पकड़कर उसे भी अन्दर खींच लिया और कहा मैं बंद नहीं कर सकती तो तुम बंद कर लो उसने कुण्डी लगाई और दोनों हाथ मेरी कमर पर रख कर जोर से अपनी बाँहों में भींच लिया हम दोनों एक दुसरे के होठो को चूसने लगे फिर मैंने अपनी T-SHIRT उतार दी उसने झटपट बेरी ब्रा खोल दिया फिर मेरे पीछे आकर मेरे ब्रेस्ट्स को दबाने लगा हम दोन की सांसे तेज हो गयी  फिर उसने  अपने सारे कपडे  उतार दिए और मेरी जींस के बटन खोले लगा मैंने उसे रोका और पूछा इतना सबकुछ हो गया तुम अपना नाम तो बताओ  उसने कहा मेरा नाम अजय है और तुम्हारा क्या नाम है ये कहते हुए उसने अपना हाथ मेरी पैंटी के अन्दर दाल  दिया मैंने सिसकारते हुए कहा सोनी वो अपनी उंगली मेरी योनी के अन्दर डालकर फिरता रहा और मैं तड़पती रही कई बार उसे रोकने की भी कोशिश की पर वो नहीं रुका   . उसने कहा सोनी अब और मत तरसाओ सेक्स करने दो न  मैंने पूछा कंडोम है उसने कहा नहीं वो तो नहीं है तो मैंने कहा तब तो सेक्स नहीं कर सकती  तो उसने कहा मैं क्या करुं मुझसे रहा नहीं जाता मैंने कहा हनी मुझे छोडो गे तभी तो कुछ करूंगी न इतना सुनते ही उसने मेरी पैंटी  से हाथ निकल लिया और मुझे छोड़ दिया मैं उसने पूछा क्या करोगी मैंने अपना हठ उसके लिंग पर फिरते हुए कहा JUST WAIT AND FEEL ME सेक्सी और मैं बैठ  गयी और उसके लिंग को अपने मुह में लेकर चूसने चाटने और जीभ से सहलाने लगी वो आंके बंद किया सिस्कारता रहा अचानक जैसे लगा उसका पूरा शरीर VIBRATE कर रहा हो मैंने भी अपनी गति तेज कर दी फिर मेरे मुह में मनो गर्म ज्वालामुखी पफूट पड़ा मैं भी पूरा का पूरा पी गयी और मुह से ही चाट कर उसे साफ भी कर दिया. वो शांत पड़ा था पर मैं तो अपने आपे से बाहर हो चुकी थी मैंने उसके लिंग को फिर से सहलाना शुरू किया अभी शुरू ही किया था की उसका लिंग तनकर खड़ा हो गया मैंने कहा अब मैं क्या करुं मुझसे भी सहा नहीं जा रहा है मेरी योनी पूरी गीली हो चुकी है उसमे  अजीब सा स्पंदन हो रहा है अन्दर कुछ रह रह कर फड़क रहा है. ये सुनकर उसने कहा मुझे अपना लिंग डालने दो मैं भी तुम्हारी प्यास बुझाना चाहता हूँ मैंने कहा पर कुछ हो गया तो. तो उसने कहा भरोसा रखो मैं अपना स्पर्म तुम्हारी योनी में नहीं गिरने दूंगा वैसे भी मेरा अभी तुरंत हुआ है अब दुबारा जबतक होगा तुम्हारी प्यास बुझ चुकी होगी. मैंने बिना कुछ बोले अपनी एक टांग बेसिन पर उठाकर रख दी उसने एक हाथ मेरी पीठ के पीछे रखा और एक हाथ से मेरी बेसिन वाली टांग पकड़ी मैंने भी एक हठ उसके पीछे रखा और एक हाथ से उसका लिंग पकड़कर अपनी योनीद्वर पर रख दिया फिर उसने एक ही झटके में अपना पूरा लिंग मरी योनी में दल दिया और अपने लिंग को ऊपर नीचे करने लगा मेरे पूरे बदन में बिजली सी दौड़ने लगी मैंने उसे जोर से पकड़ लिया SSSSSSSSEEEEE  AAAAHHHH करते हुए मेरा मुह खुला का खुला ही रह गया मेरी योनी तेजी से फड़कने लगी फिर जैसे लगा मेरी योनी के पास से से पूरे बदन में बिजली दौड़ रही है मैं अपने चरम को प् चुकी थी ये बात वो समझ चूका था उसने मुझे जोर से अपनी बाँहों में भींचा और मुझे पागलों की तरह चाटने लगा मेरी योनी से बिजली का प्रवाह धीरे धीरे शांत हो चूका था मैंने प्यार से उसके होठों को चूमा उसने कहा कपडे पहन लो  अब चलते हैं बाहर हमारे सामान को देखने वाला कोई नहीं है . हम दोनों ने झटपट अपने कपडे पहने और अपने कम्पार्टमेंट में चले गए. 
                                कम्पार्टमेंट में सारे  लोग सो गए थे मेरा लोअर बर्थ था और उसका मिडिल वो मेरे साथ मेरी सीट पर बैठ गया उसने पुछा दिल्ली में कहा जाना है मैंने उसे बताया की जे एन यू में मेरी सहेली रहती है मैं उसू के साथ रुकने वाली हु हम दोनों रत भर बातें करते रहे काफी देर बाद अपनी अपनी सीट पर सो गए सुबह ट्रेन दिल्ली पहुच गयी हम दोनों ट्रेन से उतर कर बहार आ गए उसने मेरा हाथ पकड़ रखा था मैंने पूछा क्या इरादा है छोड़ोगे नहीं क्या उसने कहा सोनी क्या तुम मेरे साथ नहीं रुक सकती हो मैंने पूछा क्या तुम अकेले रहते हो उसने कहा नहीं मेरे साथ मेरा दोस्त भी रहता है पर तीन कमरे हैं प्लीज मेरे साथ रुक जाओ न. मैंने पूछा तुम्हारा दोस्त क्या करता है उसने कहा वी पायलट है. उसे बता दूंगा तुम मेरी कजन हो मैंने सोचा के बार चलकर देख लेती हु अगर ठीक नहीं लगा तो मेरा क्या जाता है मन कर दूंगी और सबकुछ ठीक रहा तो एन्जॉय करुँगी मैंने कहा चलो देखते हैं सब ठीक रहा तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है .अगले दिन शाम पाँच बजे तक हमलोग दिल्ली पहुच चुके थे  फिर हम दोनों ने एक होटल में एक कमरा ले किया. लगभग 7 बजे तक हम दोनों अपने कमरे में SHIFT कर चुके थे कमरे में पहुचते ही उसने मुझे बेड पे पटक दिया और और पागलों की तरह मेरे चेहरे को चूमने लगा गर्मी का मौसम था उसके डियो और पसीने की मिली जुली गंध मुझे पागल कर रही थी मेरा दिमाग जैसे एक नशे के आगोश में जा रहा था और उस पे तो जैसे एक जूनून सवार था अब उसने चूमने के साथ साथ चाटना भी शुरू कर दिया मैं अपने दोनों हाथों से उसकी पीठ और बलिं को सहलाने लगी मेरे होठों को और मेरे गले को चूमते चूमते वो कब मेरी कमर तक पहुच गया मुझे पता ही नहीं चला मेरे अंगों में जब अचानक बिजली सी दौड़ने लगी तब मुझे पता चला कि उसकी जीभ वहां थी जहाँ उसका लिंग होना चाहिए था कभी अपनी जीभ वो मेरी योनी में फिरता तो कभी मेरी क्लिटोरिस के ऊपर मैं भी अपने हाथों से उसके लिंग को सहलाने लगी फिर मुझसे रहा नहीं गया मैंने उसके लिंग को अपनी योनिद्वार पे रखकर उसकी कमर को भीच लिया वो शायद इसी का इंतिजार कर रहा था वो तो जैसे bhibrate ही करने लगा मैं भी अपनी कमर उचकाकर पूरा सहयोग करने लगी पर इस से पहले की मैं चरम पर पहुचती वो शांत हो गया थके होने के कारन उसने दुबारा कोशिश भी नहीं की करीब आधे घंटे तक मेरी योनी में हल्की बिजली सी प्रवाहित होती रही फिर हम दोनों ने chekout किया और मैं उसके साथ उसके घर को चली गयी .  फिर मैं उसके साथ उसके घर गयी उसका घर सचमुच बहुत सही था . मैं वह मजे में रह सकती थी सो मैंने वहां रहने का फैसला कर लिया .